नि:शुल्क खाता बनाएँ

अपनी कुंडली सहेजें, आगे के प्रश्न पूछें, और जहाँ छोड़ा था वहीं से जारी रखें।

कोई पासवर्ड नहीं। हम केवल आपके खाते के बारे में ईमेल करते हैं।

चौघड़िया · Jalandhar, Punjab

जालंधर में आज का चौघड़िया

रविवार, २३ अगस्त २०२६ को जालंधर, पंजाब का दिन और रात का चौघड़िया, जालंधर के सूर्योदय ०५:५८ से गणना।

जालंधर में आज का दिन चौघड़िया

रविवार, २३ अगस्त २०२६ — जालंधर के सूर्योदय ०५:५८ से सूर्यास्त १९:०२ तक आठ चौघड़िया।

दिन का चौघड़िया — जालंधर, पंजाब
चौघड़ियासमयफल
उद्वेग०५:५८ – ०७:३६बचें
चर०७:३६ – ०९:१४सामान्य
लाभ०९:१४ – १०:५२शुभ
अमृत१०:५२ – १२:३०शुभ
काल१२:३० – १४:०८बचें
शुभ१४:०८ – १५:४६शुभ
रोग१५:४६ – १७:२४बचें
उद्वेग१७:२४ – १९:०२बचें

जालंधर में आज का रात चौघड़िया

सूर्यास्त १९:०२ से कल के सूर्योदय तक की आठ चौघड़िया। रात की अवधि दो तिथियों में फैलती है, इसलिए यह जालंधर के कल के सूर्योदय से निकाली गई है।

रात का चौघड़िया — जालंधर, पंजाब
चौघड़ियासमयफल
काल१९:०२ – २०:२४बचें
शुभ२०:२४ – २१:४६शुभ
रोग२१:४६ – २३:०८बचें
उद्वेग२३:०८ – ००:३०बचें
उद्वेग००:३० – ०१:५२बचें
चर०१:५२ – ०३:१४सामान्य
लाभ०३:१४ – ०४:३६शुभ
अमृत०४:३६ – ०५:५८शुभ

राहु काल भी देखें

जालंधर में आज राहु काल १७:२४ से १९:०२ है। शुभ चौघड़िया भी इस अवधि में पड़े तो परंपरा राहु काल को प्राथमिकता देती है।

यह कैसे निकाला जाता है

सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ बराबर चौघड़िया, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक आठ और। क्रम वार से तय होता है और पूरे भारत में एक ही है — जो शहर-दर-शहर बदलता है वह दिन की लंबाई है, इसीलिए यह पृष्ठ जालंधर के अपने सूर्योदय से गणना करता है।

अपनी कुंडली मुफ़्त में देखें

यह देखने के लिए कि आपके ग्रह वास्तव में कहाँ बैठे हैं, मुफ़्त वैदिक जन्म कुंडली बनाएँ - कोई साइन-अप नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जालंधर में आज चौघड़िया का समय क्या है?
२३ अगस्त २०२६ को जालंधर का दिन चौघड़िया सूर्योदय ०५:५८ से आरंभ होता है; पूरी तालिका ऊपर दी गई है।
क्या जालंधर का समय दिल्ली से अलग होता है?
हाँ। ये सभी अवधियाँ स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के विभाजन हैं, और भारत में देशांतर के अंतर से यह ७५ मिनट तक भिन्न हो सकता है। राष्ट्रीय पंचांग प्रायः दिल्ली का समय देते हैं, जो अन्य शहरों के लिए सही नहीं होता।
यह पृष्ठ किस दिन का है?
आज का — २३ अगस्त २०२६। यह प्रतिदिन जालंधर के अपने सूर्योदय से फिर से बनता है।

और देखें