नि:शुल्क खाता बनाएँ

अपनी कुंडली सहेजें, आगे के प्रश्न पूछें, और जहाँ छोड़ा था वहीं से जारी रखें।

कोई पासवर्ड नहीं। हम केवल आपके खाते के बारे में ईमेल करते हैं।

चौघड़िया · Kota, Rajasthan

कोटा में आज का चौघड़िया

रविवार, २३ अगस्त २०२६ को कोटा, राजस्थान का दिन और रात का चौघड़िया, कोटा के सूर्योदय ०६:०३ से गणना।

कोटा में आज का दिन चौघड़िया

रविवार, २३ अगस्त २०२६ — कोटा के सूर्योदय ०६:०३ से सूर्यास्त १८:५४ तक आठ चौघड़िया।

दिन का चौघड़िया — कोटा, राजस्थान
चौघड़ियासमयफल
उद्वेग०६:०३ – ०७:३९बचें
चर०७:३९ – ०९:१६सामान्य
लाभ०९:१६ – १०:५२शुभ
अमृत१०:५२ – १२:२९शुभ
काल१२:२९ – १४:०५बचें
शुभ१४:०५ – १५:४१शुभ
रोग१५:४१ – १७:१८बचें
उद्वेग१७:१८ – १८:५४बचें

कोटा में आज का रात चौघड़िया

सूर्यास्त १८:५४ से कल के सूर्योदय तक की आठ चौघड़िया। रात की अवधि दो तिथियों में फैलती है, इसलिए यह कोटा के कल के सूर्योदय से निकाली गई है।

रात का चौघड़िया — कोटा, राजस्थान
चौघड़ियासमयफल
काल१८:५४ – २०:१८बचें
शुभ२०:१८ – २१:४२शुभ
रोग२१:४२ – २३:०५बचें
उद्वेग२३:०५ – ००:२९बचें
उद्वेग००:२९ – ०१:५३बचें
चर०१:५३ – ०३:१७सामान्य
लाभ०३:१७ – ०४:४०शुभ
अमृत०४:४० – ०६:०४शुभ

राहु काल भी देखें

कोटा में आज राहु काल १७:१८ से १८:५४ है। शुभ चौघड़िया भी इस अवधि में पड़े तो परंपरा राहु काल को प्राथमिकता देती है।

यह कैसे निकाला जाता है

सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ बराबर चौघड़िया, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक आठ और। क्रम वार से तय होता है और पूरे भारत में एक ही है — जो शहर-दर-शहर बदलता है वह दिन की लंबाई है, इसीलिए यह पृष्ठ कोटा के अपने सूर्योदय से गणना करता है।

अपनी कुंडली मुफ़्त में देखें

यह देखने के लिए कि आपके ग्रह वास्तव में कहाँ बैठे हैं, मुफ़्त वैदिक जन्म कुंडली बनाएँ - कोई साइन-अप नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा में आज चौघड़िया का समय क्या है?
२३ अगस्त २०२६ को कोटा का दिन चौघड़िया सूर्योदय ०६:०३ से आरंभ होता है; पूरी तालिका ऊपर दी गई है।
क्या कोटा का समय दिल्ली से अलग होता है?
हाँ। ये सभी अवधियाँ स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के विभाजन हैं, और भारत में देशांतर के अंतर से यह ७५ मिनट तक भिन्न हो सकता है। राष्ट्रीय पंचांग प्रायः दिल्ली का समय देते हैं, जो अन्य शहरों के लिए सही नहीं होता।
यह पृष्ठ किस दिन का है?
आज का — २३ अगस्त २०२६। यह प्रतिदिन कोटा के अपने सूर्योदय से फिर से बनता है।

और देखें