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शब्दकोश

त्रिकोण (Trikona)

त्रिकोण भाव - 1, 5 और 9 - शास्त्रीय रूप से कुंडली की सर्वाधिक शुभ स्थितियाँ।

इसका अर्थ

त्रिकोण भाव हैं प्रथम, पंचम और नवम, जो परस्पर 120 अंश की दूरी पर हैं। पंचम बुद्धि, सृजन और संतान का; नवम भाग्य, गुरु और आस्था का; और प्रथम भाव इस समूह तथा केंद्र - दोनों में गिना जाता है।

इसे कैसे पढ़ा जाता है

शास्त्र इन्हें लक्ष्मी स्थान कहते हैं और यहाँ स्थित किसी भी ग्रह को समर्थित मानते हैं। सर्वाधिक प्रबल शास्त्रीय योग - राजयोग - तब बनते हैं जब कोई केंद्रेश और त्रिकोणेश आपस में जुड़ें, चाहे युति से, परस्पर दृष्टि से, या राशि-परिवर्तन से।

किन बातों का ध्यान रखें

यहाँ 'शुभ' का अर्थ अनुकूल है, सुनिश्चित नहीं। त्रिकोण-स्थिति उस मार्ग का वर्णन करती है जिससे बातें सहजता से बहती हैं; यह किसी कठिन दशा या पीड़ित भावेश को नहीं काटती।

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