नक्षत्र

मूल नक्षत्र

मूल नक्षत्र - स्वामी केतु, प्रतीक बँधी हुई जड़ों का गुच्छा, देवता निरृति। जड़ तक पहुँचना; सच्चाई को उजागर करने के लिए चीज़ों को ढहा देती है।

मूल नक्षत्र का अर्थ

जड़ तक पहुँचना; सच्चाई को उजागर करने के लिए चीज़ों को ढहा देती है। मूल का स्वामी केतु है, इसके अधिष्ठाता देवता निरृति हैं, और इसका प्रतीक बँधी हुई जड़ों का गुच्छा है - ये मिलकर इसका स्वभाव गढ़ते हैं।

आपकी कुंडली में मूल

जन्म के समय आपका चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है वही आपका जन्म नक्षत्र है - यह आपकी सहज प्रवृत्तियों को रंग देता है और आपकी विंशोत्तरी दशा का क्रम तय करता है (केतु से आरंभ)। अपने चंद्र नक्षत्र को जानने के लिए मुफ़्त जन्म कुंडली बनाएँ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मूल नक्षत्र क्या है?
मूल वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से एक है। जड़ तक पहुँचना; सच्चाई को उजागर करने के लिए चीज़ों को ढहा देती है।
मूल का स्वामी कौन-सा ग्रह है?
विंशोत्तरी दशा प्रणाली में मूल का स्वामी केतु है।
मूल के प्रतीक और देवता क्या हैं?
इसका प्रतीक बँधी हुई जड़ों का गुच्छा और अधिष्ठाता देवता निरृति हैं।

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