पुष्य नक्षत्र का अर्थ
पोषण और स्थिर देखभाल; सबसे सहायक और रक्षात्मक नक्षत्र। पुष्य का स्वामी शनि है, इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति हैं, और इसका प्रतीक गाय का थन है - ये मिलकर इसका स्वभाव गढ़ते हैं।
आपकी कुंडली में पुष्य
जन्म के समय आपका चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है वही आपका जन्म नक्षत्र है - यह आपकी सहज प्रवृत्तियों को रंग देता है और आपकी विंशोत्तरी दशा का क्रम तय करता है (शनि से आरंभ)। अपने चंद्र नक्षत्र को जानने के लिए मुफ़्त जन्म कुंडली बनाएँ।
अपनी कुंडली में देखें
यह देखने के लिए कि आपके ग्रह वास्तव में कहाँ बैठे हैं, मुफ़्त वैदिक जन्म कुंडली बनाएँ - कोई साइन-अप नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- पुष्य नक्षत्र क्या है?
- पुष्य वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से एक है। पोषण और स्थिर देखभाल; सबसे सहायक और रक्षात्मक नक्षत्र।
- पुष्य का स्वामी कौन-सा ग्रह है?
- विंशोत्तरी दशा प्रणाली में पुष्य का स्वामी शनि है।
- पुष्य के प्रतीक और देवता क्या हैं?
- इसका प्रतीक गाय का थन और अधिष्ठाता देवता बृहस्पति हैं।