परंपरा क्या कहती है
गौरी (पार्वती) को संबोधित सौभाग्य और वैवाहिक सामंजस्य का व्रत। परंपरा में सुखी वैवाहिक जीवन और पारिवारिक कल्याण के लिए किया जाता है, जिसमें हरी चूड़ियाँ, पुष्प और हल्दी-कुमकुम अर्पित होते हैं।
किसे संबोधित करती है
- शुक्र
- चंद्र
परंपरागत समय
- श्रावण के मंगलवार (मंगला-गौरी) शास्त्रीय अनुष्ठान हैं।
- भाद्रपद की गौरी-तृतीया पर भी ज़ोर है।
- शुक्ल पक्ष में करना परंपरागत है।
स्रोत
Mangala-Gauri-vrata-katha; Bhavishya Purana
आम सवाल
- गौरी-पूजा / मंगला-गौरी व्रत क्या है?
- गौरी (पार्वती) को संबोधित सौभाग्य और वैवाहिक सामंजस्य का व्रत। परंपरा में सुखी वैवाहिक जीवन और पारिवारिक कल्याण के लिए किया जाता है, जिसमें हरी चूड़ियाँ, पुष्प और हल्दी-कुमकुम अर्पित होते हैं।
- गौरी-पूजा / मंगला-गौरी व्रत किसे संबोधित करती है?
- परंपरा में यह शुक्र, चंद्र से जुड़ी है।
- गौरी-पूजा / मंगला-गौरी व्रत कब की जाती है?
- श्रावण के मंगलवार (मंगला-गौरी) शास्त्रीय अनुष्ठान हैं। भाद्रपद की गौरी-तृतीया पर भी ज़ोर है। शुक्ल पक्ष में करना परंपरागत है।
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