परंपरा क्या कहती है
गुरु-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे गुरुवार को पीले पुष्प और हल्दी के अर्पण तथा गुरु-स्तोत्र के पाठ से जोड़ते हैं। नवग्रह शांतियों में सबसे सौम्य माना जाता है; विद्यार्थियों, शिक्षकों और विवाह तय करते समय प्रायः सुझाया जाता है।
किसे संबोधित करती है
- गुरु
परंपरागत समय
- गुरुवार शास्त्रीय दिन है, विशेषकर जब चंद्रमा पुनर्वसु, विशाखा या पूर्व-भाद्रपद में हो।
- गुरु-पुष्य योग (गुरुवार + पुष्य नक्षत्र) अत्यंत शुभ बताया गया है।
स्रोत
BPHS ch. 88; Brihaspati-stotra (Skanda Purana)
आम सवाल
- गुरु-शांति / बृहस्पति-पूजा क्या है?
- गुरु-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे गुरुवार को पीले पुष्प और हल्दी के अर्पण तथा गुरु-स्तोत्र के पाठ से जोड़ते हैं। नवग्रह शांतियों में सबसे सौम्य माना जाता है; विद्यार्थियों, शिक्षकों और विवाह तय करते समय प्रायः सुझाया जाता है।
- गुरु-शांति / बृहस्पति-पूजा किसे संबोधित करती है?
- परंपरा में यह गुरु से जुड़ी है।
- गुरु-शांति / बृहस्पति-पूजा कब की जाती है?
- गुरुवार शास्त्रीय दिन है, विशेषकर जब चंद्रमा पुनर्वसु, विशाखा या पूर्व-भाद्रपद में हो। गुरु-पुष्य योग (गुरुवार + पुष्य नक्षत्र) अत्यंत शुभ बताया गया है।
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