परंपरा क्या कहती है
काल सर्प दोष का शास्त्रीय उपाय - जब सातों ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाएँ। ग्रंथ इसे त्र्यंबकेश्वर, कालहस्ती या किसी मान्य काल-सर्प तीर्थ पर नाग-पूजा तथा ऋग्वेद के सर्प-सूक्त के पाठ से जोड़ते हैं।
किसे संबोधित करती है
- राहु
- केतु
- काल सर्प दोष
परंपरागत समय
- नाग-पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) शास्त्रीय समय है।
- त्र्यंबकेश्वर (नासिक), कालहस्ती (आंध्र प्रदेश) और मन्नारसाला (केरल) परंपरा में नामित तीर्थ हैं।
- परंपरा एक पूर्ण अनुष्ठान की सलाह देती है, प्रतिवर्ष दोहराने की नहीं।
स्रोत
Sarpa-sukta (Rig-veda); Trimbakeshwar-mahatmya
आम सवाल
- काल-सर्प-शांति क्या है?
- काल सर्प दोष का शास्त्रीय उपाय - जब सातों ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाएँ। ग्रंथ इसे त्र्यंबकेश्वर, कालहस्ती या किसी मान्य काल-सर्प तीर्थ पर नाग-पूजा तथा ऋग्वेद के सर्प-सूक्त के पाठ से जोड़ते हैं।
- काल-सर्प-शांति किसे संबोधित करती है?
- परंपरा में यह राहु, केतु, काल सर्प दोष से जुड़ी है।
- काल-सर्प-शांति कब की जाती है?
- नाग-पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) शास्त्रीय समय है। त्र्यंबकेश्वर (नासिक), कालहस्ती (आंध्र प्रदेश) और मन्नारसाला (केरल) परंपरा में नामित तीर्थ हैं। परंपरा एक पूर्ण अनुष्ठान की सलाह देती है, प्रतिवर्ष दोहराने की नहीं।
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