परंपरा क्या कहती है
समृद्धि केंद्रित वैष्णव पूजा, जिसमें ऋग्वेद के खिल भाग से श्री-सूक्त का पाठ होता है। ग्रंथ इसे कमल, स्वर्ण (या उसके स्थान पर कुमकुम-अक्षत) के अर्पण और महालक्ष्मी-अष्टक से जोड़ते हैं। जिसे ग्रंथ 'श्री-वृद्धि' कहते हैं, उसका शास्त्रीय गृहस्थ अनुष्ठान।
किसे संबोधित करती है
- शुक्र
- गुरु
परंपरागत समय
- शुक्रवार संध्या, विशेषकर पूर्णिमा।
- कार्तिक अमावस्या (दीपावली) शास्त्रीय वार्षिक पर्व है।
- नए उपक्रमों के लिए अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) पर ज़ोर है।
स्रोत
Shri-sukta (Rig-vedic khila); Lakshmi-tantra ch. 22
आम सवाल
- लक्ष्मी-पूजा / श्री-सूक्त पाठ क्या है?
- समृद्धि केंद्रित वैष्णव पूजा, जिसमें ऋग्वेद के खिल भाग से श्री-सूक्त का पाठ होता है। ग्रंथ इसे कमल, स्वर्ण (या उसके स्थान पर कुमकुम-अक्षत) के अर्पण और महालक्ष्मी-अष्टक से जोड़ते हैं। जिसे ग्रंथ 'श्री-वृद्धि' कहते हैं, उसका शास्त्रीय गृहस्थ अनुष्ठान।
- लक्ष्मी-पूजा / श्री-सूक्त पाठ किसे संबोधित करती है?
- परंपरा में यह शुक्र, गुरु से जुड़ी है।
- लक्ष्मी-पूजा / श्री-सूक्त पाठ कब की जाती है?
- शुक्रवार संध्या, विशेषकर पूर्णिमा। कार्तिक अमावस्या (दीपावली) शास्त्रीय वार्षिक पर्व है। नए उपक्रमों के लिए अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) पर ज़ोर है।
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