परंपरा क्या कहती है
नृसिंह को संबोधित वैष्णव रक्षा-पाठ, परंपरा में भय और प्रतिकूल परिस्थितियों के विरुद्ध पढ़ा जाता है। ग्रंथ इसे प्रह्लाद को दिए गए नृसिंह-कवच और संध्या के अर्पण से जोड़ते हैं।
किसे संबोधित करती है
- सूर्य
- मंगल
परंपरागत समय
- नृसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) शास्त्रीय वार्षिक पर्व है।
- शनिवार और रविवार पर ज़ोर है।
- संध्या परंपरागत पाठ-समय है।
स्रोत
Narasimha-kavacha (Brahmanda Purana); Bhagavata, saptama-skandha
आम सवाल
- नृसिंह-कवच पाठ क्या है?
- नृसिंह को संबोधित वैष्णव रक्षा-पाठ, परंपरा में भय और प्रतिकूल परिस्थितियों के विरुद्ध पढ़ा जाता है। ग्रंथ इसे प्रह्लाद को दिए गए नृसिंह-कवच और संध्या के अर्पण से जोड़ते हैं।
- नृसिंह-कवच पाठ किसे संबोधित करती है?
- परंपरा में यह सूर्य, मंगल से जुड़ी है।
- नृसिंह-कवच पाठ कब की जाती है?
- नृसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) शास्त्रीय वार्षिक पर्व है। शनिवार और रविवार पर ज़ोर है। संध्या परंपरागत पाठ-समय है।
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