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पूजा

शुक्र-शांति

परंपरा में शुक्र से संबद्ध।

परंपरा क्या कहती है

शुक्र-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे शुक्रवार को लक्ष्मी को श्वेत पुष्प और खीर के अर्पण तथा श्री-सूक्त के पाठ से जोड़ते हैं। जिसे ग्रंथ 'दांपत्य-कलेश' कहते हैं - वैवाहिक कलह - तथा शुक्र महादशा में प्रायः सुझाया जाता है।

किसे संबोधित करती है

  • शुक्र

परंपरागत समय

  • शुक्रवार प्रातः, विशेषकर अष्टमी और पूर्णिमा तिथि।
  • भरणी-पूर्व फाल्गुनी-पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों पर ज़ोर है।
  • प्रायः श्री-सूक्त या महालक्ष्मी-अष्टक के पाठ के साथ।

स्रोत

BPHS ch. 88; Lakshmi-tantra

आम सवाल

शुक्र-शांति क्या है?
शुक्र-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे शुक्रवार को लक्ष्मी को श्वेत पुष्प और खीर के अर्पण तथा श्री-सूक्त के पाठ से जोड़ते हैं। जिसे ग्रंथ 'दांपत्य-कलेश' कहते हैं - वैवाहिक कलह - तथा शुक्र महादशा में प्रायः सुझाया जाता है।
शुक्र-शांति किसे संबोधित करती है?
परंपरा में यह शुक्र से जुड़ी है।
शुक्र-शांति कब की जाती है?
शुक्रवार प्रातः, विशेषकर अष्टमी और पूर्णिमा तिथि। भरणी-पूर्व फाल्गुनी-पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों पर ज़ोर है। प्रायः श्री-सूक्त या महालक्ष्मी-अष्टक के पाठ के साथ।

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