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पूजा

सूर्य-शांति / आदित्य-हृदय पाठ

परंपरा में सूर्य से संबद्ध।

परंपरा क्या कहती है

सूर्य-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य और रामायण के युद्धकांड से आदित्य-हृदय के पाठ से जोड़ते हैं। सूर्य के नीच, राहु/केतु से अस्त, या छठे/आठवें/बारहवें भाव में होने पर प्रायः सुझाया जाता है।

किसे संबोधित करती है

  • सूर्य

परंपरागत समय

  • रविवार सूर्योदय शास्त्रीय समय है।
  • रवि-पुष्य योग और सप्तमी तिथि पर परंपरा ज़ोर देती है।
  • उत्तरायण (मध्य जनवरी से मध्य जुलाई) विशेष फलदायी माना जाता है।

स्रोत

Aditya-hridaya (Valmiki-Ramayana); BPHS ch. 88

आम सवाल

सूर्य-शांति / आदित्य-हृदय पाठ क्या है?
सूर्य-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य और रामायण के युद्धकांड से आदित्य-हृदय के पाठ से जोड़ते हैं। सूर्य के नीच, राहु/केतु से अस्त, या छठे/आठवें/बारहवें भाव में होने पर प्रायः सुझाया जाता है।
सूर्य-शांति / आदित्य-हृदय पाठ किसे संबोधित करती है?
परंपरा में यह सूर्य से जुड़ी है।
सूर्य-शांति / आदित्य-हृदय पाठ कब की जाती है?
रविवार सूर्योदय शास्त्रीय समय है। रवि-पुष्य योग और सप्तमी तिथि पर परंपरा ज़ोर देती है। उत्तरायण (मध्य जनवरी से मध्य जुलाई) विशेष फलदायी माना जाता है।

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