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पूजा

स्वयंवर-पार्वती पूजा

परंपरा में शुक्र, मंगल, मंगल दोष से संबद्ध।

परंपरा क्या कहती है

पार्वती के स्वयंवर स्वरूप को संबोधित विवाह केंद्रित शाक्त पूजा, परंपरा में विलंबित या बाधित विवाह के लिए सुझाई जाती है। ग्रंथ इसे स्वयंवर-पार्वती मंत्र तथा लाल पुष्प और सिंदूर के अर्पण से जोड़ते हैं।

किसे संबोधित करती है

  • शुक्र
  • मंगल
  • मंगल दोष

परंपरागत समय

  • शुक्रवार और सोमवार पर ज़ोर है।
  • श्रावण के मंगला-गौरी मंगलवार विवाह के लिए परंपरागत अनुष्ठान हैं।
  • प्रायः शुक्ल पक्ष में किया जाता है।

स्रोत

Swayamvara-Parvati-kalpa; Rudra-yamala-tantra

आम सवाल

स्वयंवर-पार्वती पूजा क्या है?
पार्वती के स्वयंवर स्वरूप को संबोधित विवाह केंद्रित शाक्त पूजा, परंपरा में विलंबित या बाधित विवाह के लिए सुझाई जाती है। ग्रंथ इसे स्वयंवर-पार्वती मंत्र तथा लाल पुष्प और सिंदूर के अर्पण से जोड़ते हैं।
स्वयंवर-पार्वती पूजा किसे संबोधित करती है?
परंपरा में यह शुक्र, मंगल, मंगल दोष से जुड़ी है।
स्वयंवर-पार्वती पूजा कब की जाती है?
शुक्रवार और सोमवार पर ज़ोर है। श्रावण के मंगला-गौरी मंगलवार विवाह के लिए परंपरागत अनुष्ठान हैं। प्रायः शुक्ल पक्ष में किया जाता है।

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