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अष्टकवर्ग कैलकुलेटर

बारहों राशियों का सर्वाष्टकवर्ग, और नीचे हर ग्रह की अपनी बिंदु पंक्ति। शास्त्रीय BPHS तालिकाओं से गणना — नि:शुल्क, बिना साइन-अप।

समय पता नहीं? खाली छोड़ दें — हम दोपहर 12 बजे के अनुसार कुंडली पढ़ेंगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अष्टकवर्ग क्या है?
यह बिंदुओं की एक पद्धति है। सातों ग्रह कुछ राशियों को एक-एक बिंदु देते हैं, और यह गणना हर दूसरे ग्रह तथा लग्न से की जाती है। किसी एक ग्रह को मिले बिंदुओं की पंक्ति भिन्नाष्टकवर्ग कहलाती है; सातों को जोड़ दें तो सर्वाष्टकवर्ग बनता है — प्रायः लोग इसी को 'अपना अष्टकवर्ग' कहते हैं।
सर्वाष्टकवर्ग में कितने बिंदु अच्छे माने जाते हैं?
कुल 337 बिंदु बारह राशियों में बँटते हैं, अतः औसत 28 है और हर राशि को इसी के सापेक्ष पढ़ना चाहिए। प्रचलित व्यवहार में 30 या अधिक को प्रबल और 25 से कम को क्षीण माना जाता है — किंतु ये सीमाएँ व्यवहार की परिपाटी हैं, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अंक नहीं; शास्त्र तालिकाएँ देता है, सीमाएँ नहीं।
कम बिंदु वाली राशि का क्या अर्थ है?
इतना ही कि वहाँ ग्रहों का योगदान कम है, जिसे अधिक सोच-समझकर किए गए प्रयास की आवश्यकता माना जाता है। यह बुरी राशि नहीं है और न ही कोई भविष्यवाणी। हर कुंडली में ऊँची और नीची दोनों राशियाँ होती हैं — कुल 337 निश्चित है, इसलिए कहीं शिखर होगा तो कहीं गर्त भी।
गोचर में अष्टकवर्ग का उपयोग कैसे होता है?
वस्तुतः यही इसका मुख्य उपयोग है। जब कोई ग्रह किसी राशि से गुज़रता है, तो उस ग्रह की अपनी पंक्ति में उस राशि के बिंदु देखे जाते हैं: 4 या अधिक हों तो गोचर फलदायी, 3 या कम हों तो क्षीण माना जाता है। सर्वाष्टकवर्ग को भी उसी प्रकार समग्र भार के लिए पढ़ा जाता है।
क्या सटीक जन्म समय आवश्यक है?
सहायक है, किंतु अन्य टूल्स की तुलना में यहाँ इसका महत्व कम है। बिंदु-तालिकाएँ ग्रह-स्थितियों से गिनी जाती हैं, जो तिथि और स्थान से काफ़ी हद तक तय हो जाती हैं; केवल लग्न की पंक्ति आपके लग्न पर निर्भर है। समय न देने पर कुंडली दोपहर 12 बजे के अनुसार पढ़ी जाती है।