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वर्षफल कैलकुलेटर
जीवन के किसी एक वर्ष की ताजिक वर्ष-कुंडली — उस वर्ष की मुंथा और बनने वाले ताजिक योग। नि:शुल्क, बिना साइन-अप।
आपके जीवन का कौन-सा वर्ष?
पहला वर्ष वह है जो आपके पहले जन्मदिन से आरंभ होता है, तीसवाँ वर्ष वह जो तीसवें जन्मदिन से। खाली छोड़ दें तो हम आपका वर्तमान चल रहा वर्ष लेंगे।
समय पता नहीं? खाली छोड़ दें — हम दोपहर 12 बजे के अनुसार कुंडली पढ़ेंगे।
साइन-अप की ज़रूरत नहीं। हम आपकी जानकारी कभी साझा नहीं करते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- वर्षफल क्या है?
- वर्षफल जीवन के एक वर्ष की कुंडली है। यह उस क्षण पर बनाई जाती है जब गोचर का सूर्य ठीक उसी अंश पर लौटता है जहाँ आपके जन्म के समय था — इसे सूर्य-प्रत्यागमन कहते हैं, जो हर वर्ष आपके जन्मदिन के आसपास पड़ता है। उसी क्षण की कुंडली से उस पूरे वर्ष को पढ़ा जाता है। इसे ताजिक पद्धति भी कहा जाता है।
- 'जीवन का वर्ष' का क्या अर्थ है — क्या यह 2026 जैसा कोई वर्ष है?
- नहीं, यह कैलेंडर वर्ष नहीं है। यहाँ वर्ष की गिनती आपके जन्मदिन से होती है: तीसवाँ वर्ष वह है जो आपके तीसवें जन्मदिन से आरंभ होकर इकतीसवें जन्मदिन तक चलता है। इसीलिए जिस वर्ष में आप अभी चल रहे हैं, उसकी संख्या आपकी पूरी हो चुकी आयु के बराबर होती है। टूल में वर्ष चुनने पर वह यह भी दिखाता है कि वह वर्ष किन दो कैलेंडर वर्षों के बीच पड़ता है।
- मुंथा क्या है?
- मुंथा वर्ष के साथ आगे बढ़ने वाला एक बिंदु है। जन्म के समय यह आपके लग्न की राशि में होती है और जीवन के हर वर्ष ठीक एक राशि आगे खिसक जाती है। वर्ष-कुंडली के जिस भाव में वह पड़ती है, ताजिक ग्रंथ उसी से वर्ष का समग्र स्वरूप बताते हैं — कुछ भावों को सहायक और कुछ को अधिक सावधानी माँगने वाला माना गया है।
- ताजिक योग जन्म कुंडली के योगों से अलग कैसे हैं?
- दोनों की दृष्टि-पद्धति ही अलग है। ताजिक 5° की सँकरी कक्षा तथा युति, 60°, 90°, 120° और 180° की दृष्टियों पर चलता है, जबकि पाराशरी ज्योतिष पूर्ण भाव-आधारित दृष्टि लेता है। इसीलिए इत्थशाल, ईसराफ या तंबीर जैसे ग्यारह ताजिक योग वर्ष-कुंडली में ही देखे जाते हैं, जन्म कुंडली की योग-सूची में नहीं आते।
- क्या वर्षफल से यह पता चलता है कि वर्ष में क्या होगा?
- नहीं। वर्ष-कुंडली वर्ष का स्वरूप बताती है, उसकी घटनाएँ नहीं — और ताजिक पद्धति स्वयं एकमत नहीं है। यह लगभग तेरहवीं शताब्दी में फ़ारसी-अरबी ज्योतिष से भारतीय ज्योतिष में आई, और मुंथा की भाव-तालिका से लेकर योगों की गणना तक कई बातें ताजिक नीलकंठी और बाद के आचार्यों में भिन्न हैं। इसे विषयों के रूप में पढ़ें, भविष्यवाणी के रूप में नहीं।