इस यात्रा के बारे में
कुंभकोणम के आसपास नौ ग्रहों के मंदिरों का पारंपरिक मार्ग, जो तंजावुर, मयिलाडुतुरै और तिरुवारूर ज़िलों तथा पुदुच्चेरी के कराईकल तक फैला है। कोई निश्चित क्रम नहीं है; यात्राएँ आमतौर पर भौगोलिक आधार पर इसे पूर्वी और पश्चिमी दिन में बाँटती हैं।
पड़ाव, सामान्य क्रम में
क्रम सामान्य है, अनिवार्य नहीं।
- 1वैदीश्वरन कोइल (मंगल)
पूर्वी दिन
- 2तिरुवेंकाडु (बुध)
पूर्वी दिन
- 3कीळपेरुम्पल्लम (केतु)
पूर्वी दिन
- 4तिरुनल्लार (शनि)
पूर्वी दिन - कराईकल, पुदुच्चेरी में
- 5सूर्यनार कोविल (सूर्य)
पश्चिमी दिन
- 6कंजनूर (शुक्र)
पश्चिमी दिन
- 7तिरुनागेश्वरम (राहु)
पश्चिमी दिन
- 8आलंगुडी (बृहस्पति)
पश्चिमी दिन
- 9तिंगलूर (चंद्र)
पश्चिमी दिन
रास्ते की जानकारी
- मंदिर कुंभकोणम से लगभग 5 से 50 किमी (सीधी दूरी) पर हैं; सड़क से दूरी अधिक है।
- सबसे दूर के दो मंदिर, तिंगलूर और कीळपेरुम्पल्लम, सीधी दूरी में लगभग 80 किमी दूर हैं।
- जल्दबाज़ी वाली एक-दिन की यात्राएँ भी होती हैं; कुंभकोणम से सामान्यतः दो दिन की योजना बनती है।
आम सवाल
- तमिलनाडु नवग्रह यात्रा में कितने दिन लगते हैं?
- सामान्यतः 2 दिन, कुंभकोणम (या मयिलाडुतुरै) को आधार बनाकर।
- तमिलनाडु नवग्रह यात्रा के पड़ाव कौन से हैं?
- सामान्य क्रम: वैदीश्वरन कोइल (मंगल) → तिरुवेंकाडु (बुध) → कीळपेरुम्पल्लम (केतु) → तिरुनल्लार (शनि) → सूर्यनार कोविल (सूर्य) → कंजनूर (शुक्र) → तिरुनागेश्वरम (राहु) → आलंगुडी (बृहस्पति) → तिंगलूर (चंद्र)। क्रम सामान्य है, अनिवार्य नहीं।
- तमिलनाडु नवग्रह यात्रा किसके लिए की जाती है?
- परंपरा में सभी नौ ग्रहों के लिए।
तथ्य 1 नवंबर 2026 को मंदिर ट्रस्ट, राज्य बंदोबस्ती विभाग और पर्यटन विभाग के पन्नों से जाँचे गए।
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