इस यात्रा के बारे में
मंगल और मंगल दोष के लिए मंगलनाथ, पितृ-कर्म के लिए सिद्धवट, और त्रिवेणी का नवग्रह मंदिर - आमतौर पर महाकालेश्वर के साथ। एक दिन में उत्तरी क्षेत्र और त्रिवेणी हो जाते हैं; दूसरा दिन महाकालेश्वर के लिए उपयुक्त है।
पड़ाव, सामान्य क्रम में
क्रम सामान्य है, अनिवार्य नहीं।
- 1मंगलनाथ (मंगल, मंगल दोष)
शहर के उत्तर में, शिप्रा तट पर
- 2सिद्धवट (पितृ तर्पण)
भैरवगढ़, उसी उत्तरी क्षेत्र में
- 3काल भैरव मंदिरवैकल्पिक
- 4नवग्रह मंदिर, त्रिवेणी (नौ ग्रह)
उज्जैन–इंदौर मार्ग पर, लगभग 5 किमी बाहर
- 5महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
शहर के मध्य में
रास्ते की जानकारी
- मंगलनाथ, सिद्धवट और काल भैरव शहर के उत्तरी हिस्से में पास-पास हैं।
- त्रिवेणी का नवग्रह मंदिर विपरीत दिशा में, उज्जैन–इंदौर मार्ग पर है।
आम सवाल
- उज्जैन ग्रह यात्रा में कितने दिन लगते हैं?
- सामान्यतः 1 से 2 दिन, उज्जैन को आधार बनाकर।
- उज्जैन ग्रह यात्रा के पड़ाव कौन से हैं?
- सामान्य क्रम: मंगलनाथ (मंगल, मंगल दोष) → सिद्धवट (पितृ तर्पण) → नवग्रह मंदिर, त्रिवेणी (नौ ग्रह) → महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग। क्रम सामान्य है, अनिवार्य नहीं।
- उज्जैन ग्रह यात्रा किसके लिए की जाती है?
- परंपरा में सभी नौ ग्रहों, मंगल दोष और पितृ दोष के लिए।
तथ्य 1 नवंबर 2026 को मंदिर ट्रस्ट, राज्य बंदोबस्ती विभाग और पर्यटन विभाग के पन्नों से जाँचे गए।
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