नियम
परंपरा के अनुसार बच्चे का नाम उस अक्षर से शुरू होता है जो जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र-पाद में था, उसे दिया गया है। पुष्य नक्षत्र के चार पाद और उनके अक्षर हैं: पाद 1 - Hu (हू); पाद 2 - He (हे); पाद 3 - Ho (हो); पाद 4 - Da (डा)। हर नक्षत्र 13°20′ का होता है और हर पाद 3°20′ का - इसलिए पाद खगोलीय गणना से निकलता है, पर अक्षर परंपरा से आता है, गणना से नहीं।
अपना पाद कैसे जानें
पाद जानने के लिए जन्म का समय और स्थान चाहिए - केवल तारीख़ काफ़ी नहीं, क्योंकि चंद्रमा एक पाद लगभग छह घंटे में पार कर लेता है। मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से अपना नक्षत्र और पाद निकालें, फिर नीचे उसी पाद की सूची देखें। यदि पाद पता न हो, तो चारों सूचियाँ देखी जा सकती हैं - नाम तब भी पुष्य नक्षत्र के अनुरूप रहेगा।
एक बात साफ़ कर दें
पाद 4 (डा) मूर्धन्य अक्षर हैं। संस्कृत-मूल के प्रचलित नामों में इनसे शुरू होने वाले नाम लगभग नहीं मिलते, इसलिए परंपरा में - और हर प्रकाशित सूची में - इनके स्थान पर दन्त्य अक्षर (दा) स्वीकार कर लिए जाते हैं। नीचे दी गई सूचियाँ इसी छूट पर आधारित हैं। हम यह बात छिपाकर नाम नहीं दे रहे - यह बता रहे हैं, ताकि आप चाहें तो अपने पंडित से पुष्टि कर लें।
पाद 1 - Hu (हू)
2 नाम
लड़के
- Humayun (हुमायूँ)भाग्यशाली, शुभ
लड़कियाँ
- Hutashini (हुताशिनी)अग्नि को समर्पित
पाद 2 - He (हे)
4 नाम
लड़के
- Hemant (हेमंत)हेमंत ऋतु
- Hemang (हेमांग)स्वर्ण-अंग वाला
लड़कियाँ
- Hema (हेमा)स्वर्णिम
- Hetal (हेतल)स्नेहशील
पाद 3 - Ho (हो)
2 नाम
लड़के
- Hojas (होजस)ओज से भरा
लड़कियाँ
- Holika (होलिका)होली की अग्नि से संबंधित
पाद 4 - Da (डा)
4 नाम · ये नाम दन्त्य दा के अंतर्गत हैं: मूर्धन्य रूप से शुरू होने वाले नाम लगभग नहीं मिलते, इसलिए परंपरा दन्त्य अक्षर स्वीकार करती है।
लड़के
- Daksh (दक्ष)कुशल; एक प्रजापति
- Darsh (दर्श)दर्शन; अमावस्या
लड़कियाँ
- Darshana (दर्शना)दर्शन
- Dakshita (दक्षिता)कुशलता
अपना नक्षत्र मुफ़्त में जानें
जन्म विवरण भरें और अपना चंद्र नक्षत्र तथा पाद जानें - पारंपरिक नामकरण यहीं से शुरू होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- पुष्य नक्षत्र में जन्मे बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें?
- यह पाद पर निर्भर करता है: पाद 1 - Hu (हू); पाद 2 - He (हे); पाद 3 - Ho (हो); पाद 4 - Da (डा)।
- क्या नामाक्षर का पालन ज़रूरी है?
- यह एक परंपरा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं। कई परिवार इसे नामकरण संस्कार में निभाते हैं और घर का नाम अलग रखते हैं। यह पूरी तरह परिवार का निर्णय है।
- अलग-अलग सूचियों में अक्षर अलग क्यों होते हैं?
- कुछ पादों पर परंपराएँ वास्तव में भिन्न हैं - जैसे रोहिणी और मृगशिरा में व और ब, तथा श्रवण में ख और ज। जहाँ ऐसा है, इस पृष्ठ पर दोनों पाठ दिए गए हैं, किसी एक को चुपचाप नहीं चुना गया।
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