२०२७ में तुला
२०२७ में अधिकांश समय बृहस्पति सिंह में रहेगा - तुला से गिनने पर आपका ग्यारहवाँ भाव। क्षेत्र: मित्रता, संपर्क, लाभ और बड़े लक्ष्य। ग्यारहवाँ भाव लाभ और संपर्कों का है - लोगों के माध्यम से आय, बहुत दिनों से रुकी इच्छाओं का चलना, और वरिष्ठ मित्र जो द्वार खोलते हैं।
२०२७ में गुरु गोचर
बृहस्पति पूरे वर्ष एक ही राशि में नहीं रहता - वक्री होने के कारण वह छोड़ी हुई राशि में फिर लौट सकता है। तुला से गिनने पर:
| अवधि | बृहस्पति | आपका भाव | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| १ जनवरी – २४ जनवरी | सिंह | ग्यारहवाँ भाव | मित्रता, संपर्क, लाभ और बड़े लक्ष्य |
| २५ जनवरी – २५ जून | कर्क | दसवाँ भाव | करियर, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन |
| २६ जून – २६ नवंबर | सिंह | ग्यारहवाँ भाव | मित्रता, संपर्क, लाभ और बड़े लक्ष्य |
| २७ नवंबर – ३१ दिसंबर | कन्या | बारहवाँ भाव | एकांत, हानि, अवचेतन और आध्यात्मिक मुक्ति |
२०२७ में शनि
२०२७ में अधिकांश समय शनि मीन में रहेगा - आपका छठा भाव। छठे भाव का शनि बलवान है: नौकरी, स्वास्थ्य-नियम, ऋण और विवाद - सब उसी के पक्ष में जो बस लगा रहता है। वर्ष के भीतर शनि राशि बदलता है: मीन (१ जनवरी – २ जून), फिर मेष (३ जून – १९ अक्टूबर), फिर मीन (२० अक्टूबर – ३१ दिसंबर)।
२०२७ में राहु-केतु अक्ष
राहु मकर में (आपका चौथा भाव) और केतु ठीक सामने कर्क में (आपका दसवाँ भाव)। राहु-केतु सदैव वक्र चलते हैं और सदैव आमने-सामने रहते हैं, इसलिए यह दो स्थितियाँ नहीं, एक अक्ष है: चौथे भाव वह क्षेत्र है जहाँ वर्ष आपको किसी नए और अपरिचित की ओर खींचता है, और दसवें भाव वह जहाँ किसी अभ्यस्त चीज़ को छोड़ने को कहता है।
यह कैसे निकाला गया है
इस पृष्ठ की हर तिथि वास्तविक निरयण स्थिति है, किसी साँचे से नहीं लिखी गई - वक्री होकर लौटने वाली स्थितियाँ भी, इसीलिए एक ही राशि दो बार दिख सकती है। भाव पूर्ण-राशि पद्धति से तुला से गिने गए हैं, इसलिए वही वर्ष बारह राशियों के लिए अलग पढ़ा जाता है। फल का विवरण हमारा है; गणित किसी भी पंचांग से जाँचा जा सकता है।
तुला राशि के बारे में
तुला सामंजस्य, न्याय और साझेदारी चाहती है - आकर्षक और कूटनीतिक। काम है निर्णय-क्षमता: दोनों पक्ष तौलते रहने के बजाय चुनना।
अपनी चंद्र राशि मुफ़्त में जानें
वैदिक ज्योतिष सूर्य से नहीं, चंद्र राशि से पढ़ता है - और अधिकांश लोगों की चंद्र राशि अलग निकलती है। जन्म विवरण भरें, कोई साइन-अप नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- तुला २०२७ राशिफल चंद्र राशि से है या सूर्य राशि से?
- चंद्र राशि से। वैदिक वार्षिक फल में धीमे ग्रहों के भाव चंद्र राशि से गिने जाते हैं - साढ़े साती भी इसी से तय होती है। अपनी चंद्र राशि मुफ़्त कैलकुलेटर से जान सकते हैं।
- २०२७ में तुला के मुख्य गोचर कौन से हैं?
- बृहस्पति सिंह और कर्क और सिंह और कन्या में, शनि मीन और मेष और मीन में, और राहु-केतु अक्ष मकर/कर्क पर। गुरु का भाव वर्ष का मुख्य विषय है, शनि का अनुशासन।
- क्या २०२७ में तुला पर साढ़े साती है?
- नहीं। साढ़े साती के लिए शनि का चंद्र राशि से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में होना आवश्यक है, और २०२७ में वह आपके छठे भाव में है।
- एक ही वर्ष में बृहस्पति दो राशियों में क्यों दिखता है?
- क्योंकि वह वक्री होता है। बृहस्पति किसी राशि में प्रवेश करके कुछ माह के लिए पिछली राशि में लौट सकता है, फिर दोबारा प्रवेश करता है। तालिका हर अवधि की तिथि अलग देती है, क्योंकि पूरे वर्ष को एक राशि मान लेना बीच के महीनों के लिए ग़लत होगा।
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