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2026 का राशिफल

वृश्चिक राशिफल २०२६

वृश्चिक वार्षिक राशिफल २०२६: २०२६ में अधिकांश समय बृहस्पति मिथुन में रहेगा — वृश्चिक से गिनने पर आपका आठवाँ भाव। क्षेत्र: गहराई, रूपांतरण, साझा संसाधन और

२०२६ में वृश्चिक

२०२६ में अधिकांश समय बृहस्पति मिथुन में रहेगा — वृश्चिक से गिनने पर आपका आठवाँ भाव। क्षेत्र: गहराई, रूपांतरण, साझा संसाधन और गुप्त बातें। आठवें भाव का गुरु शांत और भीतरी है — संयुक्त वित्त, शोध, उत्तराधिकार, और वे अंत जो बहुत पहले हो जाने चाहिए थे। विस्तार नहीं, गहराई।

२०२६ में गुरु गोचर

बृहस्पति पूरे वर्ष एक ही राशि में नहीं रहता — वक्री होने के कारण वह छोड़ी हुई राशि में फिर लौट सकता है। वृश्चिक से गिनने पर:

गुरु गोचर २०२६
अवधिबृहस्पतिआपका भावक्षेत्र
१ जनवरी – १ जूनमिथुनआठवाँ भावगहराई, रूपांतरण, साझा संसाधन और गुप्त बातें
२ जून – ३१ अक्टूबरकर्कनौवाँ भावभाग्य, आस्था, उच्च शिक्षा और लंबी यात्रा
१ नवंबर – ३१ दिसंबरसिंहदसवाँ भावकरियर, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन

२०२६ में शनि

२०२६ में अधिकांश समय शनि मीन में रहेगा — आपका पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव का शनि विद्या, सृजन और संतान के विषयों में अनुशासन माँगता है। प्रगति धीमी, पर इस वर्ष जो सीखा जाता है वह टिकता है।

२०२६ में राहु-केतु अक्ष

राहु कुंभ में (आपका चौथा भाव) और केतु ठीक सामने सिंह में (आपका दसवाँ भाव)। राहु-केतु सदैव वक्र चलते हैं और सदैव आमने-सामने रहते हैं, इसलिए यह दो स्थितियाँ नहीं, एक अक्ष है: चौथे भाव वह क्षेत्र है जहाँ वर्ष आपको किसी नए और अपरिचित की ओर खींचता है, और दसवें भाव वह जहाँ किसी अभ्यस्त चीज़ को छोड़ने को कहता है।

यह कैसे निकाला गया है

इस पृष्ठ की हर तिथि वास्तविक निरयण स्थिति है, किसी साँचे से नहीं लिखी गई — वक्री होकर लौटने वाली स्थितियाँ भी, इसीलिए एक ही राशि दो बार दिख सकती है। भाव पूर्ण-राशि पद्धति से वृश्चिक से गिने गए हैं, इसलिए वही वर्ष बारह राशियों के लिए अलग पढ़ा जाता है। फल का विवरण हमारा है; गणित किसी भी पंचांग से जाँचा जा सकता है।

वृश्चिक राशि के बारे में

वृश्चिक हर चीज़ को तीव्रता से महसूस करती है - निजी, चुंबकीय, सब-कुछ-या-कुछ-नहीं। छाया है नियंत्रण और मन में पलने वाला बैर।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृश्चिक २०२६ राशिफल चंद्र राशि से है या सूर्य राशि से?
चंद्र राशि से। वैदिक वार्षिक फल में धीमे ग्रहों के भाव चंद्र राशि से गिने जाते हैं — साढ़े साती भी इसी से तय होती है। अपनी चंद्र राशि मुफ़्त कैलकुलेटर से जान सकते हैं।
२०२६ में वृश्चिक के मुख्य गोचर कौन से हैं?
बृहस्पति मिथुन और कर्क और सिंह में, शनि मीन में, और राहु-केतु अक्ष कुंभ/सिंह पर। गुरु का भाव वर्ष का मुख्य विषय है, शनि का अनुशासन।
क्या २०२६ में वृश्चिक पर साढ़े साती है?
नहीं। साढ़े साती के लिए शनि का चंद्र राशि से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में होना आवश्यक है, और २०२६ में वह आपके पाँचवें भाव में है।
एक ही वर्ष में बृहस्पति दो राशियों में क्यों दिखता है?
क्योंकि वह वक्री होता है। बृहस्पति किसी राशि में प्रवेश करके कुछ माह के लिए पिछली राशि में लौट सकता है, फिर दोबारा प्रवेश करता है। तालिका हर अवधि की तिथि अलग देती है, क्योंकि पूरे वर्ष को एक राशि मान लेना बीच के महीनों के लिए ग़लत होगा।

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