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पूजा

केतु-शांति

परंपरा में केतु से संबद्ध।

परंपरा क्या कहती है

केतु-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे मंगलवार संध्या को गणेश को अर्पण और केतु-स्तोत्र के पाठ से जोड़ते हैं। केतु महादशा में प्रायः सुझाया जाता है, विशेषकर जब जातक जिसे ग्रंथ 'अव्यक्त-भय' कहते हैं - अनिश्चित, बिना कारण की बेचैनी - की बात करे।

किसे संबोधित करती है

  • केतु

परंपरागत समय

  • मंगलवार संध्या; ग्रहण पर विशेष ज़ोर।
  • अश्विनी-मघा-मूल नक्षत्र परंपरा में उल्लिखित हैं।
  • प्रायः गणपति-अथर्वशीर्ष के पाठ के साथ।

स्रोत

BPHS ch. 88; Ketu-stotra (Brahmanda Purana)

आम सवाल

केतु-शांति क्या है?
केतु-शांति का अनुष्ठान। ग्रंथ इसे मंगलवार संध्या को गणेश को अर्पण और केतु-स्तोत्र के पाठ से जोड़ते हैं। केतु महादशा में प्रायः सुझाया जाता है, विशेषकर जब जातक जिसे ग्रंथ 'अव्यक्त-भय' कहते हैं - अनिश्चित, बिना कारण की बेचैनी - की बात करे।
केतु-शांति किसे संबोधित करती है?
परंपरा में यह केतु से जुड़ी है।
केतु-शांति कब की जाती है?
मंगलवार संध्या; ग्रहण पर विशेष ज़ोर। अश्विनी-मघा-मूल नक्षत्र परंपरा में उल्लिखित हैं। प्रायः गणपति-अथर्वशीर्ष के पाठ के साथ।

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