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पूजा

पितृ-पक्ष श्राद्ध

परंपरा में सूर्य, चंद्र, पितृ दोष से संबद्ध।

परंपरा क्या कहती है

पितृ पक्ष के सोलह दिनों में किया जाने वाला वार्षिक पितृ-अर्पण। ग्रंथ इसे तर्पण (जल-अर्पण) और पिंड-दान से जोड़ते हैं, उस तिथि पर जो पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाती हो। जिसे ग्रंथ 'पितृ-दोष' कहते हैं, उसका शास्त्रीय उपाय।

किसे संबोधित करती है

  • सूर्य
  • चंद्र
  • पितृ दोष

परंपरागत समय

  • भाद्रपद कृष्ण पक्ष (प्रायः सितंबर) शास्त्रीय सोलह-दिवसीय अवधि है।
  • पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाती तिथि सबसे महत्वपूर्ण दिन है।
  • गया, प्रयाग और काशी के घाट परंपरा में नामित तीर्थ हैं।

स्रोत

Garuda Purana, Pretakhanda; Manu-smriti ch. 3

आम सवाल

पितृ-पक्ष श्राद्ध क्या है?
पितृ पक्ष के सोलह दिनों में किया जाने वाला वार्षिक पितृ-अर्पण। ग्रंथ इसे तर्पण (जल-अर्पण) और पिंड-दान से जोड़ते हैं, उस तिथि पर जो पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाती हो। जिसे ग्रंथ 'पितृ-दोष' कहते हैं, उसका शास्त्रीय उपाय।
पितृ-पक्ष श्राद्ध किसे संबोधित करती है?
परंपरा में यह सूर्य, चंद्र, पितृ दोष से जुड़ी है।
पितृ-पक्ष श्राद्ध कब की जाती है?
भाद्रपद कृष्ण पक्ष (प्रायः सितंबर) शास्त्रीय सोलह-दिवसीय अवधि है। पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाती तिथि सबसे महत्वपूर्ण दिन है। गया, प्रयाग और काशी के घाट परंपरा में नामित तीर्थ हैं।

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