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तीर्थ

ब्रह्म कपाल बद्रीनाथ पिंडदान

ब्रह्म कपाल, बद्रीनाथ, उत्तराखंड: परंपरा में पितृ दोष के लिए दर्शन किया जाता है।

लोग यहाँ क्यों जाते हैं

बद्रीनाथ मंदिर के ठीक उत्तर में अलकनंदा तट का घाट, जहाँ पिंडदान और श्राद्ध किए जाते हैं, जैसा कि बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति बताती है।

देवता और स्थान

मुख्य देवता
बद्रीनाथ मंदिर के पास अलकनंदा तट का घाट
स्थान
बद्रीनाथ, उत्तराखंड

परंपरा में होने वाली पूजा

  • पिंडदान और श्राद्ध - घाट पर किए जाते हैं, जैसा कि मंदिर समिति बताती है।

संबंधित पूजा: पितृ-पक्ष श्राद्ध

परंपरागत दिन

पितृ दोष के अनुष्ठान परंपरा में अमावस्या को किए जाते हैं।

अगले शुभ दिन

  • सोमवार, 9 नवंबर 2026
  • मंगलवार, 8 दिसंबर 2026
  • गुरुवार, 7 जनवरी 2027

नई दिल्ली के पंचांग से; भारत के दूसरे हिस्सों में दिन एक आगे-पीछे हो सकता है।

भारत में अन्य विकल्प

अलग-अलग क्षेत्रों से चुने गए हैं ताकि आप अपनी पहुँच में कोई स्थान चुन सकें - कोई एक ही सही जगह नहीं है।

जाने से पहले

  • मौसमी: केवल तभी जाया जा सकता है जब बद्रीनाथ खुला हो, लगभग मई से नवंबर।
  • दर्शन का समय, पहनावे के नियम और कोई भी बुकिंग मंदिर तय करता है - जाने से पहले उसका आधिकारिक पेज देख लें।
  • फ़ोटोग्राफ़ी के नियम हर मंदिर में अलग होते हैं; अंदर लगे निर्देशों और कर्मचारियों की बात मानें।

आधिकारिक वेबसाइट

दर्शन का समय, पहनावे के नियम, बुकिंग और कोई भी शुल्क मंदिर तय करता है और ये बदलते रहते हैं - वर्तमान जानकारी उसकी आधिकारिक साइट पर है।

आधिकारिक साइट देखें ↗

आम सवाल

ब्रह्म कपाल, बद्रीनाथ किसके लिए जाना जाता है?
परंपरा में पितृ दोष के लिए दर्शन किया जाता है।
ब्रह्म कपाल, बद्रीनाथ में कौन सी पूजा होती है?
स्रोत यहाँ ये अनुष्ठान बताते हैं: पिंडदान और श्राद्ध।
ब्रह्म कपाल, बद्रीनाथ जाने के लिए परंपरागत दिन कौन सा है?
पितृ दोष के अनुष्ठान परंपरा में अमावस्या को किए जाते हैं।
ब्रह्म कपाल, बद्रीनाथ में दर्शन का समय क्या है?
समय मौसम और पर्वों के साथ बदलता है, इसलिए यह गाइड उसे नहीं बताती। जाने से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
भारत में और कहाँ जा सकते हैं?
अन्य विकल्प: त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), गया (बिहार) और बिंदु सरोवर, सिद्धपुर (गुजरात)।

तथ्य 1 नवंबर 2026 को मंदिर ट्रस्ट, राज्य बंदोबस्ती विभाग और पर्यटन विभाग के पन्नों से जाँचे गए।

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