नि:शुल्क खाता बनाएँ

अपनी कुंडली सहेजें, आगे के प्रश्न पूछें, और जहाँ छोड़ा था वहीं से जारी रखें।

कोई पासवर्ड नहीं। हम केवल आपके खाते के बारे में ईमेल करते हैं।

विंशोत्तरी दशा

गुरु महादशा (Jupiter Mahadasha)

सोलह वर्ष विस्तार, ज्ञान और मार्गदर्शन के — शास्त्रीय रूप से नौ में सबसे शुभ।

यह काल क्या लाता है

गुरु के सोलह वर्ष चीज़ों को चौड़ा करते हैं: ज्ञान, साधन, परिवार, प्रतिष्ठा और उन लोगों का दायरा जो आपको गंभीरता से लेते हैं। गुरु मिलते हैं, और स्वयं गुरु बनने की भूमिका भी आती है। संतान और उच्च शिक्षा इसके शास्त्रीय कारकत्व हैं।

कहाँ यह अनुकूल रहता है

अध्यापन, विधि, वित्त, परामर्श, उच्च शिक्षा, और वह हर काम जहाँ विश्वसनीय होना ही योग्यता है।

कहाँ सावधानी माँगता है

संयम। गुरु बिना भेद के बढ़ाता है, इसलिए वज़न, व्यय और वचन — सब बढ़ते हैं — और आत्मसंतोष इस काल का शांत जोखिम है।

नौ अंतर्दशाएँ

हर महादशा नौ उप-अवधियों (अंतर्दशा या भुक्ति) में बँटती है, उसी निश्चित क्रम में, और आरंभ स्वयं उसी स्वामी से होता है। हर अंतर्दशा गुरु के 16 वर्ष गुणा उस उप-स्वामी का 120 में हिस्सा है — इसलिए नीचे की तालिका गणित है, मत नहीं। आपकी अपनी तिथियाँ जन्म के समय चंद्र नक्षत्र पर निर्भर हैं, जो कैलकुलेटर निकाल देता है।

गुरु महादशा — नौ अंतर्दशाएँ
अंतर्दशाअवधि
गुरु – गुरु2 वर्ष 2 माह
गुरु – शनि2 वर्ष 6 माह
गुरु – बुध2 वर्ष 3 माह
गुरु – केतु11 माह
गुरु – शुक्र2 वर्ष 8 माह
गुरु – सूर्य10 माह
गुरु – चंद्र1 वर्ष 4 माह
गुरु – मंगल11 माह
गुरु – राहु2 वर्ष 5 माह

इसे ईमानदारी से कैसे पढ़ें

गुरु महाशुभ है, पर सोलह वर्ष इतने लंबे हैं कि प्रतिष्ठा से अधिक स्थिति मायने रखती है। शुभ स्थिति में यह वह काल है जिसे लोग अपने बनने का समय मानते हैं; अशुभ स्थिति में यह सोलह वर्ष 'लगभग' का।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु महादशा कितने वर्ष की होती है?
सोलह वर्ष, 120 वर्ष के विंशोत्तरी चक्र में से।
क्या गुरु महादशा सबसे शुभ दशा है?
प्रतिष्ठा से सबसे शुभ, और प्रायः व्यवहार में भी। पर वे सोलह वर्ष क्या देंगे, यह कुंडली में गुरु के भाव, राशि और बल से तय होता है।