यह काल क्या लाता है
राहु के अठारह वर्ष इच्छा को बढ़ाते हैं और आपको किसी अपरिचित जगह ले जाते हैं — विदेश, नया क्षेत्र, अपरंपरागत मार्ग, या बस ऐसा जीवन जिसकी परिवार को अपेक्षा न थी। वृद्धि वास्तविक होती है पर सीधी रेखा में नहीं, और प्रायः उससे तेज़ आती है जितनी तेज़ी से नीचे की ज़मीन जमती है।
कहाँ यह अनुकूल रहता है
हर नया, तकनीकी, विदेशी या स्थापित व्यवस्था से बाहर का काम। राहु उन्हें फल देता है जो सार्वजनिक रूप से नौसिखिया बनने को तैयार हों।
कहाँ सावधानी माँगता है
संतोष और रूढ़ि। शास्त्रीय चेतावनी है भ्रम — किसी वस्तु के पीछे केवल इसलिए भागना कि वह चमकती है — और व्यावहारिक चेतावनी है क्षमता से अधिक फैल जाना।
नौ अंतर्दशाएँ
हर महादशा नौ उप-अवधियों (अंतर्दशा या भुक्ति) में बँटती है, उसी निश्चित क्रम में, और आरंभ स्वयं उसी स्वामी से होता है। हर अंतर्दशा राहु के 18 वर्ष गुणा उस उप-स्वामी का 120 में हिस्सा है — इसलिए नीचे की तालिका गणित है, मत नहीं। आपकी अपनी तिथियाँ जन्म के समय चंद्र नक्षत्र पर निर्भर हैं, जो कैलकुलेटर निकाल देता है।
| अंतर्दशा | अवधि |
|---|---|
| राहु – राहु | 2 वर्ष 8 माह |
| राहु – गुरु | 2 वर्ष 5 माह |
| राहु – शनि | 2 वर्ष 10 माह |
| राहु – बुध | 2 वर्ष 7 माह |
| राहु – केतु | 1 वर्ष 1 माह |
| राहु – शुक्र | 3 वर्ष |
| राहु – सूर्य | 11 माह |
| राहु – चंद्र | 1 वर्ष 6 माह |
| राहु – मंगल | 1 वर्ष 1 माह |
इसे ईमानदारी से कैसे पढ़ें
राहु छाया बिंदु है, ग्रह नहीं, और उसकी अपनी कोई निश्चित राशि नहीं: वह उस भाव से फल देता है जिसमें बैठा है और उस ग्रह से जो उसका स्वामी है। इसीलिए एक ही अठारह वर्ष की दशा दो व्यक्तियों के लिए बिल्कुल असंबंधित अनुभव दे सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- राहु महादशा कितने वर्ष की होती है?
- अठारह वर्ष — शुक्र के बाद दूसरी सबसे लंबी।
- क्या राहु महादशा अशुभ होती है?
- यह अशुभ नहीं, तीव्र होती है। यह महत्वाकांक्षा और परिवर्तन बढ़ाती है, और कुंडली में राहु के भाव तथा उसके स्वामी से फल देती है — इसलिए व्यक्ति-व्यक्ति में बहुत अंतर होता है।