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मुहूर्त

शुभ मुहूर्त

अवसर के अनुसार शुभ तिथियाँ - पंचांग के आधार पर छाँटी गईं, हर नियम और हर योग्य तिथि सहित।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ये तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं?
वर्ष की हर तिथि पंचांग के पाँच अंगों - वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण - तथा मौसमी निषेधों पर परखी जाती है। रिक्ता तिथियाँ, अमावस्या, भद्रा (विष्टि करण) और अशुभ योग हर अवसर के लिए हटा दिए जाते हैं; फिर हर अवसर के अपने नक्षत्र, तिथि और वार लगाए जाते हैं। कुछ भी हाथ से नहीं चुना जाता।
क्या इस सूची की तिथि ही मुहूर्त है?
अकेले नहीं। मुहूर्त एक स्थान पर समय की खिड़की होती है - उस क्षण उदय होने वाला लग्न मायने रखता है, और कई बार संबंधित व्यक्ति की कुंडली भी। ये सूचियाँ वर्ष को उन दिनों तक सीमित करती हैं जो पात्र हैं, और उसके बाद पंडित जी समय निश्चित करते हैं।
अलग-अलग अवसरों की सूचियाँ इतनी भिन्न क्यों हैं?
क्योंकि नियम वास्तव में अलग हैं। विवाह के लिए उपयुक्त नक्षत्र वही नहीं हैं जो वाहन खरीदने के लिए हैं, और निषेध भी अलग हैं - चातुर्मास विवाह टाल देता है, पर वाहन खरीद पर उसका कोई प्रभाव नहीं।
ये गणना किस स्थान के लिए है?
नई दिल्ली, भारत (IST)। तिथि और नक्षत्र पूरे भारत में लगभग एक जैसे रहते हैं, पर सूर्योदय, सूर्यास्त और अंग बदलने का सटीक समय देशांतर के साथ बदलता है - इसलिए किसी सीमावर्ती तिथि पर निर्णय से पहले अपने शहर का पंचांग देख लें।

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