परंपरा क्या कहती है
पूर्ण नवग्रह शांति। सामान्य 'पाप-साम्य' - अनेक ग्रह पीड़ाएँ जहाँ किसी एक ग्रह-शांति से बात न बने - का शास्त्रीय अनुष्ठान। ग्रंथ इसे पूर्ण अग्नि-होम से जोड़ते हैं, जिसमें हर ग्रह की अलग समिधा होती है।
किसे संबोधित करती है
- सूर्य
- चंद्र
- मंगल
- बुध
- गुरु
- शुक्र
- शनि
- राहु
- केतु
- पाप साम्य
परंपरागत समय
- संक्रांति (सूर्य का नई राशि में प्रवेश) पर करना श्रेष्ठ है।
- प्रायः विवाह, गृह-प्रवेश या बड़े कार्य से पहले किया जाता है।
- परंपरा इसे एक ही मुहूर्त में पूरा करने पर ज़ोर देती है, कई दिनों में बाँटने पर नहीं।
स्रोत
BPHS ch. 88; Brihad-Daivajna-ranjana
आम सवाल
- नवग्रह-शांति (पूर्ण नौ-ग्रह अनुष्ठान) क्या है?
- पूर्ण नवग्रह शांति। सामान्य 'पाप-साम्य' - अनेक ग्रह पीड़ाएँ जहाँ किसी एक ग्रह-शांति से बात न बने - का शास्त्रीय अनुष्ठान। ग्रंथ इसे पूर्ण अग्नि-होम से जोड़ते हैं, जिसमें हर ग्रह की अलग समिधा होती है।
- नवग्रह-शांति (पूर्ण नौ-ग्रह अनुष्ठान) किसे संबोधित करती है?
- परंपरा में यह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु, पाप साम्य से जुड़ी है।
- नवग्रह-शांति (पूर्ण नौ-ग्रह अनुष्ठान) कब की जाती है?
- संक्रांति (सूर्य का नई राशि में प्रवेश) पर करना श्रेष्ठ है। प्रायः विवाह, गृह-प्रवेश या बड़े कार्य से पहले किया जाता है। परंपरा इसे एक ही मुहूर्त में पूरा करने पर ज़ोर देती है, कई दिनों में बाँटने पर नहीं।
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